कुंडलिनी और सात चक्र




1. #मूलाधार चक्र :
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यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह 'आधार चक्र' है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है।
मंत्र : लं
चक्र जगाने की विधि : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यािन लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना।
प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता,
निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है। लिंग और गुदा को संकुचन करके प्राणायाम किया जाये।नाभि के नीचे भाग पर लाल जेस्पर (#red #Jasper) रखना चाहिए।
2. #स्वाधिष्ठान चक्र-
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यह वह चक्र है, जो लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है जिसकी छ: पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है तो आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने
की प्रधानता रहेगी। यह सब करते हुए
ही आपका जीवन कब व्यतीत
हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे।
मंत्र : वं
कैसे जाग्रत करें : जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं। मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उससे जुड़कर आप
जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है। नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते।
प्रभाव : इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हो तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी। मूलबन्ध लगाकर वायु को अंदर रोककर मंत्र का जाप का प्रयास करे।
3. #मणिपुर चक्र :
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नाभि के मूल में स्थित रक्त वर्ण का यह चक्र शरीर के
अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है, जो दस कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस
व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी
रहती है। ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं।
मंत्र : रं
कैसे जाग्रत करें : आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे। पेट से श्वास लें। प्रभाव : इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली,
लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है।
सिद्धियां प्राप्त करने के लिए आत्मवान होना जरूरी है। आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, आत्मा हैं। आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं।
इस स्थान पर मन्त्र जपते हुए ध्यान केंद्रित करें।यहाँ सुनेला (citrin) रखें।
4. #अनाहत चक्र-
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हृदय स्थल में स्थित स्वर्णिम वर्ण का द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त द्वादश स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही #अनाहत चक्र है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय है, तो आप एक
सृजनशील व्यक्ति होंगे। हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते हैं। आप चित्रकार, कवि, कहानीकार,
इंजीनियर आदि हो सकते हैं।
मंत्र : यं
कैसे जाग्रत करें : हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह
अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को भेदकर ऊपर गमन करने लगती है। प्रभाव : इसके सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा,
कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है।
इसके जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है।व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक
रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता हैं।
ऐसा व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है ।हृदय के पास #green #avenrurine या #rose #Quartz रखें।
5. #विशुद्ध चक्र-
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कंठ में सरस्वती का स्थान है, जहां #विशुद्ध चक्र है और जो सोलह पंखुरियों वाला है। सामान्यतौर पर
यदि आपकी ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होंगे।
मंत्र : हं
कैसे जाग्रत करें : कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से
यह चक्र जाग्रत होने लगता है।
प्रभाव : इसके जाग्रत होने कर सोलह कलाओं और सोलह विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत
होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है। यहाँ #कटेला #Amethyst रखे।
6. #आज्ञाचक्र :
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भ्रूमध्य (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में #आज्ञा चक्र है। सामान्यतौर पर जिस
व्यक्ति की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है। इस बौद्धिक सिद्धि कहते हैं।
मंत्र : ऊं
कैसे जाग्रत करें : भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।
प्रभाव : यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस आज्ञा चक्र का जागरण होने से ये सभी
शक्तियां जाग पड़ती हैं और व्यक्ति एक सिद्धपुरुष बन जाता है।मस्तष्क पर असली चन्दन की बिंदी लगाये।
7. #सहस्रार चक्र :
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#सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदि व्यक्ति यम, नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह
आनंदमय शरीर में स्थित हो गया है। ऐसे व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है।
कैसे जाग्रत करें :
#मूलाधार से होते हुए ही सहस्रार तक
पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जाग्रत
हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।
प्रभाव : शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण
विद्युतीय और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही मोक्ष का द्वार है।
आचार्य अनिल वर्मा 
9811715366
#ज्योतिष #वास्तु, सम्बंधित सभी समस्याओं के समाधान , मंत्र विधान, साधना के बारे में मार्गदर्शन के लिए संपर्क करें।
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#रत्न कैसे काम करते है।

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#रत्न कैसे काम करते हैं ?
रत्नों अवशोषित तरंगें हमारे तन और मन पर जो सूक्ष्मतर तरंगे का प्रभाव छोडती है वह अद्रश्य चेतना का विषय है | उसे रसायन, भोतिक, जैविक आदि शास्त्रों की तरह प्रयोगशाला में जांचा-परखा नहीं जा सकता | रत्नों की कार्य पद्धति ठीक रंग चिकित्सा की तरह है | जिस रंग के कारण शरीर के अवयवों में न्यूनता आती है, #रत्न #सूर्य की रश्मियों से वह रंग शोषित करके शरीर में समाविस्ट कर देते हैं | रत्नों से सूक्ष्मतर स्पंदन हमारे स्वभाव, गुण तथा कर्मानुसार प्रभाव छोड़ते हैं और हमें अनेक समस्यों से मुक्ति दिलाते हैं |
यह पूर्णतया वैज्ञानिक है। इसीलिए #आभूषण के रुप में पहनने के साथ रत्न द्वारा भाग्यशाली प्रभाव पाने के लिए भी लगभग प्रत्येक देश में पहना जाता है। रत्न का अनुकूल अथवा प्रतिकूल प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि उनका उचित चयन किया गया है अथवा नहीं। यह कार्य एक #रत्न #विज्ञान की जानकारी रखने वाला विद्वान ही कर सकता। इसके लिए लम्बी गणनाऍ करनी पड़ती हैं जो दोनों वर्गो के लिए उचित ज्ञान के अभाव में संभव नहीं हैं। रत्न का उचित चुनाव न हो पाने के कारण व्यक्ति को उसका लाभ भी नहीं मिल पाता और इसीलिए इस विज्ञान को अंधविश्वास, ठगी, हास्यासपद आदि की श्रेणी में रख दिया जाता है।
#सूर्य की #किरणों को जब प्रिज्म से निकलने दिया जाता है तो वह किरण सात रंगों में दिखाई देती है। इसको यदि पर्दे पर लिया जाए तो यह सात रंग निश्चित क्रम में देखे जा सकते हैं। रंगो का यह क्रम है – बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल। यह रंग कैसे दिखाई देते हैं, यह समझ लिया जाए तो रत्न विज्ञान सरल हो जाएगा। किसी भी वस्तु के रंग का हमें प्रकाश से ही आभास होता है। जिस रंग या रंगों की वस्तु होती है, #सूर्य #प्रकाश किरण का वह रंग उस में समाहित नहीं हो पाता जबकि उस रंग के अलावा सब रंग उसमें समाहित हो जाते है। परावर्तन के नियम से जब समाहित न होने वाले रंग की किरण हमारी ऑख तक पहॅुचती है तो हमें यह रंग प्रतीत होता है। उदाहरण के लिए कोई नीले रंग का फूल किरण के छः रंग तो अपने में समाहित कर लेगा। सातवॉ नीला रंग हमारी ऑख में पड़ेगा और हमें फूल नीला प्रतीत होगा।
हमारे ग्रहों के भी सात रंग हैं, यह सिद्ध किया जा चुका है। सूर्य का रंग नारंगी है। चंद्रमा का श्वेत, मंगल का लाल, बुद्ध का हरा, गुरु का पीला, शुक्र का श्वेत और शनि का काला रंगा है। काले रंग का अर्थ है रंगों का अभाव। यह रंग अन्य रंगों को अपने अंदर समेट लेता है। यह कोई भी रंग बाहर नहीं फेंकता। शनि भी इसी गुण कारण रंग अपने में लेता ही लेता है, देता नहीं। इसीलिए शनि के दुष्प्रभाव के लिए दान देने की ही प्रथा है।
रत्न विभिन्न रंगों के होने के कारण किसी ग्रह विशेष का रंग बाहर फेंक देते हैं। रत्न का फोकस जितना उत्तम तराशा गया होगा, रंग विशेष का गुण उतना ही अधिक व्यक्ति के उंगली, गले, माथे आदि में छूते रहने के कारण उसमें प्रवेश करेगा। पहले घरों की खिड़कियों में रंग-बिरंगे कॉच इसी उद्देश्य से लगवाए जाते थे कि कॉच के रंगों वाली रश्मियॉ अपने गुण विशेष से घर को प्रभावित करती रहें। जल चिकित्सा का भी यही सिद्धांत है। जो गुण दोष सूर्य की रश्मियों में विभिन्न रंगों के कारण होते हैं, वह उस रंग की कॉच की बोतल द्वारा उसमें भरे शुद्ध जल में उत्पन्न करवाये जाते हैं। यह जल औषधि का कार्य करता है। शरीर में उस रंग से सम्बन्धित क्षति को यह पूरा करता है।
प्रश्न यह उठता है कि जब विभिन्न रंगों के सस्ते कॉच से कार्य चल सकता है तो महॅगें और दुर्लभ उन्हीं रंगों के रत्न क्यॅू लिए जाऍ? कॉच में भी तो रश्मियों को आत्मकेन्द्रित करने का गुण निहित है।
इसका जबाब यह है कि रत्न पूर्णतया विभिन्न रसायनों के एकत्रित होने से प्राकृतिक रुप से अन्य खनिज लवणों की तरह अरबों-खरबों वर्षों में बनतें हैं। रत्नों का बनना रसायनिक क्रिया है। यह पूर्णतया वैज्ञानिक है । सॉलिड स्टेट (सेमी कण्डक्टर) इलैक्ट्रानिकी सिलिकॉन और जर्मेनियम में जो शुद्ध रुप से विद्युत का कुचालक है, दस लाख अणुओं के पीछे एक अणु दूसरे विशेष तत्व को मिला देने पर भी विद्युत धारा के अर्धसंचालक बन जाते हैं अर्थात् इनमें एक ही दिशा में करेंट प्रवाहित हो सकता है। विपरीत दिशा में करेंट का बहना सम्भव नहीं है। रत्न भी इसी पध्दति पर काम करते हैं।
इस प्रक्रिया से शरीर और प्रयोग किए गये रत्न और दुष्प्रभाव देने वाले ग्रह के रंग स्पंदनों में सामंजस्य स्थापित होने लगता है। रंगों के अतिरिक्त पीज़ो और फोटो इलैक्ट्रिक प्रभाव द्वारा भी रत्न प्रभाव डालते हैं। पीज़ो प्रभाव अर्थात् दबाव से भी इनमें इलैक्ट्रिो मैग्निटिक प्रभाव होता है, यह सिद्ध किया जा चुका है। धीरे-धीरे उस ग्रह का प्रतिकूल प्रभाव घटने लगता है और जनसाधारण की भाषा में इस अनुरुप परिणाम को रत्नों द्वारा चमत्कार की संज्ञा दी जाने लगती है।
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Acharya Anil Verma
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#गृह शांति उपाय ।






#गृह शांति उपाय ।
#ग्रहों की शांति के लिए सरल एवं अचूक उपाय प्रस्तुत हैं- ऋषि पाराशर प्रणीत ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपाय बताए गए हैं।
1. #सूर्य ग्रहों का राजा है। इसलिए देवाधिदेव भगवान् विष्णु की अराधना से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य को जल देना, गायत्री मंत्र का जप करना, रविवार का व्रत करना तथा रविवार को केवल मीठा भोजन करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य का रत्न 'माणिक्य' धारण करना चाहिए परंतु यदि क्षमता न हो तो तांबे की अंगूठी में सूर्य देव का चिह्न बनवाकर दाहिने हाथ की अनामिका में धारण करें (रविवार के दिन) तथा साथ ही सूर्य के मंत्र का 108 बार जप करें।
ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
2. ग्रहों में #चंद्रमा को स्त्री स्वरूप माना है। भगवान शिव ने चंद्रमा को मस्तक पर धारण किया है। चंद्रमा के देवता भगवान शिव हैं। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं व शिव चालीसा का पाठ करें। 16 सोमवार का व्रत करें तो चंद्रमा ग्रह द्वारा प्रदत्त कष्ट दूर होते हैं। रत्नों में मोती चांदी की अंगूठी में धारण कर सकते हैं। चंद्रमा के दान में दूध, चीनी, चावल, सफेद पुष्प, दही (सफेद वस्तुओं) का दान दिया जाता है तथा मंत्र जप भी कर सकते हैं।
ऊँ सों सोमाय नमः
3. जन्मकुंडली में #मंगल यदि अशुभ हो तो मंगलवार का व्रत करें, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करें। मूंगा रत्न धारण करें या तांबे की अंगूठी बनवाकर उसमें हनुमान जी का चित्र अंकितकर मंगलवार को धारण कर सकते हैं। स्त्रियों को हनुमान जी की पूजा करना वर्जित बताया गया है। मंगल के दान में गुड़, तांबा, लाल चंदन, लाल फूल, फल एवं लाल वस्त्र का दान दें।
ऊँ अं अंगारकाय नमः
4. ग्रहों में #बुध युवराज है। बुध यदि अशुभ स्थिति में हो तो हरा वस्त्र न पहनें तथा भूलकर भी तोता न पालें। अन्यथा स्वास्थ्य खराब रह सकता है। बुध संबंधी दान में हरी मूंग, हरे फल, हरी सब्जी, हरा कपड़ा दान-दक्षिणा सहित दें व बीज मंत्र का जप करें।
ऊँ बुं बुधाय नमः
5. #गुरु : #गुरु का अर्थ ही महान है- सर्वाधिक अनुशासन, ईमानदार एवं कर्त्तव्यनिष्ठ। गुरु तो देव गुरु हैं। जिस जातक का गुरु निर्बल, वक्री, अस्त या पापी ग्रहों के साथ हो तो वह ब्रह्माजी की पूजा करें। केले के वृक्ष की पूजा एवं पीपल की पूजा करें। पीली वस्तुओं (बूंदी के लडडू, पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल, पीले फल) आदि का दान दें। रत्नों में पुखराज सोने की अंगूठी में धारण कर सकते हैं व बृहस्पति के मंत्र का जप करते रहें।
ऊँ बृं #बृहस्पतये नमः
6. #शुक्र असुरों का गुरु, भोग-विलास, गृहस्थ एवं सुख का स्वामी है। शुक्र स्त्री जातक है तथा जन समाज का प्रतिनिधित्व करता है। जिन जातकों का शुक्र पीड़ित करता हो, उन्हें गाय को चारा, ज्वार खिलाना चाहिए एवं समाज सेवा करनी चाहिए। रत्नों में हीरा धारण करना चाहिए या बीज मंत्र का जप करें।
ऊँ शुं शुक्राय नमः
7. #सूर्य पुत्र #शनि, ग्रहों में न्यायाधीश है तथा न्याय सदैव कठोर ही होता है जिससे लोग शनि से भयभीत रहते हैं। शनि चाहे तो राजा को रंक तथा रंक को राजा बना देता है। शनि पीड़ा निवृत्ति हेतु महामृत्युंजय का जप, शिव आराधना करनी चाहिए। शनि के क्रोध से बचने के लिए काले उड़द, काले तिल, तेल एवं काले वस्त्र का दान दें। शनि के रत्न (नीलम) को धारण कर सकते हैं।
ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
8. #राहु की राक्षसी प्रवृत्ति है। इसे ड्रेगन्स हैड भी कहते हैं। राहु के दान में कंबल, लोहा, काले फूल, नारियल, कोयला एवं खोटे सिक्के आते हैं। नारियल को बहते जल में बहा देने से राहु शांत हो जाता है। राहु की महादशा या अंतर्दशा में राहु के मंत्र का जप करते रहें। गोमेद रत्न धारण करें।
ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।
9. #केतु राक्षसी मनोवृत्ति वाले राहु का निम्न भाग है। राहु शनि के साथ समानता रखता है एवं केतु मंगल के साथ। इसके आराध्य देव गणपति जी हैं। केतु के उपाय के लिए काले कुत्ते को शनिवार के दिन खाना खिलाना चाहिए। किसी मंदिर या धार्मिक स्थान में कंबल दान दें। रत्नों में लहसुनिया धारण करें।
ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः
दान मुहूर्त
1. #सूर्य का दान : ज्ञानी पंडित को रविवार दोपहर के समय।
2. #चंद्र का दान : सोमवार के दिन, पूर्णमासी या एकादशी को नवयौवना स्त्री को देना चाहिए।
3. #मंगल का दान : क्षत्रिय नवयुवक को दोपहर के समय।
4. #बुध का दान : किसी कन्या को बुधवार शाम के समय।
5. #गुरु का दान : ब्राह्मण, ज्योतिषी को प्रातः काल।
6. #शुक्र का दान : सायंकाल के समय नवयुवती को।
7. #शनि का दान : शनिवार को गरीब, अपाहिज को शाम के समय।
8. #राहु का दान : कोढ़ी को शाम के समय।
9. #केतु का दान : साधु को देना चाहिए।

#AVENTURINE



#AVENTURINE
#Aventurine is a form of #quartz, characterised by its translucency and the presence of platy[clarification needed] mineral inclusions that give a shimmering or glistening effect termed #aventurescence.
The most common colour of #aventurine is green, but it may also be orange, brown, yellow, blue, or gray. Chrome-bearing fuchsite (a variety of muscovite mica) is the classic inclusion, and gives a silvery green or blue sheen. Oranges and browns are attributed to hematite or goethite. Because aventurine is a rock, its physical properties vary: its specific gravity may lie between 2.64-2.69 and its hardness is somewhat lower than single-crystal quartz at around 6.5.
यह #क्रिस्टल कल्पना, साथ ही बुद्धि और मानसिक #स्पष्टता,#रचनात्मकता के सभी क्षेत्रों में लाभ प्राप्त करने के लिए है। यह #समृद्धि को बढ़ाता है और #कैरियर की सफलता लाता है। यह एक सौम्य पत्थर उर्जा कि शांत और संतुलन की भावना देता है और खुशी को बढ़ाता है। सभी स्थितियों में विकल्प और क्षमता को देखने के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण, साहस और आंतरिक शक्ति में भी यह मदद करता है । यह किस्मत लाने के लिए, विशेष रूप से मौका देता हैं। ग्रीन #Aventurine भी समृद्धि का एक रहस्यमय पत्थर है। किसी के जीवन के लिए दोस्ती लाने के लिए और यह संरक्षण ऊर्जा का भी एक पत्थर है। लोकगीत और आध्यात्मिक विद्या का कहना है कि शारीरिक रूप से यह रक्त, संचार प्रणाली के लिए फायदेमंद है, ब्लड प्रेशर, #साइनस की समस्याओं, उल्टी, सिर दर्द, सामान्य स्वास्थ्य, एलर्जी, एक्जिमा, बुखार, और नींद संबंधी विकार संतुलन। ध्यान दें कि #चिकित्सा #क्रिस्टल अर्थ उपचार के लिए आध्यात्मिक समर्थन कर रहे हैं और नुस्खे या स्वास्थ्य के बारे में जानकारी नहीं हैं।
यह #क्रिस्टल #हृदय  #चक्र के साथ जुड़ा हुआ है। इस तरह के नीले, आड़ू या लाल के रूप में #Aventurine के अलग अलग रंग, और इनके रंगों के अनुसार अतिरिक्त गुण होते हैं और रंग के अनुसार विभिन्न चक्रों से संबंधित हैं।

Introduction to Meaning and Uses of Clear Quartz




Introduction to Meaning and Uses of Clear Quartz
Ordinary yet extraordinary, colorful and clear, Quartz crystals are the most common and abundant in the world, comprising the largest and most diverse family in the mineral kingdom. "From ancient times to the present day, quartz crystals have been a source of Light to mankind. Highly valued by spiritual leaders and healers as well as scientists, the unique attributes of quartz have played a key role in mankind' evolutionary development." 
यह क्रिस्टल वास्तु दोष के निवारण के लिए , दक्षिण -पूर्व (south-east) जो शुक्र का प्रतिनिधित्व करता है , घर में स्त्रियों के लिए , स्त्री गृहस्थ सुख के लिए , धन के स्रोत्र बढ़ाने के लिए , आकर्षण के लिए , बातचीत व्यवहार के लिए , प्रजनन क्षमता , कामुकता पर कण्ट्रोल करके घर के वातावरण को खुशहाल समृद्ध बनाता है। यह प्रेम ,सोहाद्र,लक्ष्मि ,विलास,ऐश्वर्या का प्रतिक है ,
यह क्रिस्टल ध्यान योग मैं हृदय चक्र को उठता है और विशुद्ध चक्र की और गति करने में सहायक होता है। 
इसको घर में कैसे कहाँ उपयोग करें इसके लिए संपर्क करें 
आचार्य अनिल वर्मा 
9811715366 
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#Azurite #crystal


                                                     


#Azurite #crystal
To the inhabitants of Atlantis and the early Egyptians, #Azurite was a most potent psychic stone and shrouded in mystery; its secrets known only to the highest priests and priestesses. It was called the Stone of Heaven by the ancient Chinese who believed it to open celestial gateways, and was revered by Greeks and Romans for its visionary insights and healing powers. For the Mayans, #Azurite inspired the mystical self and facilitated the transfer of #wisdom and #knowledge via thought, while Native Americans used this sacred stone to contact their spiritual Indian guide,
Physically, #azurite is professed by folklore and crystal healers to be helpful for healing in general, cancer prevention, liver issues, arthritis, joint problems, depression, sinuses, skin problems. Azurite contains copper.
also we use in #vastu #correction, #protection from #evil eye, improve production, and labour worker problem in #industries.
Note that healing crystal meanings are #spiritual supports to healing and are not prescriptions or healthcare information.
Azurite is most closely related to the #third eye #chakra, and can balance, stimulate, and empower it. It will also work to align all of the #chakras.
Acharya Anil Verma 
#Astrologer and #vastu #consultant
9811715366, 8826098989

वैदिक ज्योतिष और रत्न





 
          


वैदिक ज्योतिष और रत्न
वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के पांच प्रकार से उपाए किये जाते है।
मंत्र , रत्न , दान , स्नान , ओषधि।
हम यहाँ रत्न के बारे में बात करते है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली के लग्न , चन्द्र लग्न , और सूर्य लग्न के अधिपति की स्थिति , इन तीनो लग्नो में जो सबसे मजबूत स्थिति में हो ,उसके अनुसार उसके स्वामी गृह के रत्न का चुनाव किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार विभिन्न ग्रहों की शुभता को बढ़ाने के लिए रत्न धारण किया जाता है , इसलिए कुंडली में जो केंद्र और त्रिकोण के शुभ स्वामी हो , जो योगकारक गृह हो उसके शुभत्व को बढ़ाने के लिए उस गृह से सम्बंधित रत्न का चुनाव करना सबसे श्रेष्ठ है।
अनेको बार मेरे पास जातक आते है जिनको कई बार में गलत रत्न धारण किये हुए देखता हूँ , मैं हैरान होता हूँ की कई बार मेरे मित्र ज्योतिष सिर्फ महादशा के अनुसार ,या चन्द्र राशि के अनुसार रत्न पहना देते है जिससे जातक को लाभ की बजाये नुकसान ही होता है ,और वो रत्न का व्यय भी बेकार हो जाता है।
लोग शनि और उसके रत्न नीलम से बहुत डराए गए है जबकि मेरे अनुभव से राहु और उसका रत्न गोमेद कभी भी सही जाँच पड़ताल किये बिना नहीं पहनना चाहिए। राहु और उसका रत्न तीव्र फल ,अचानक फल देता है ,राहु का स्वभाव भी कुंडली में उसकी स्थिति ,भाव , सम्बन्ध के अनुसार ही देखा जाता है , उसका अपनी कोई राशि तो है नहीं , इसलिए राहु का रत्न बहुत ध्यान से बताना पड़ता है। कभी कभी लोग मोती को सिर्फ गुस्सा शांत करने का रत्न समझकर पहन लेते है लेकिन यदि चन्द्र भाव या चन्द्र स्थिति ६ , ८ , १२ हुई तो यही मोती व्यक्ति को डिप्रेशन भी दे देता है।
इसी प्रकार विभिन्न लग्नो और ग्रहों के लिए रत्न बहुत सावधानी से जन्मपत्रिका की पूर्ण जाँच करके ही पहनना चाहिये।
किसी भी प्रकार के समस्या के निवारण के लिए ,ज्योतिष , वास्तु , राशि रत्न , रुद्राक्ष , मंत्र अनुष्ठान , उपाए , सम्बंधित सलाह के लिए संपर्क करें।
Acharya Anil Verma
Master in Astrology and Vastu science
C7/73 First floor , Pradeep Bhatia Road
Sector-7 Rohini Delhi
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Tourmaline -तुरमुली




Tourmaline -तुरमुली -यह पत्थर अनेको रंगो मैं निकलता है ,इसका सदियों से ज्योतिष विभिन्न रंगो के अनुसार अलग अलग ग्रहों की ऊर्जा प्राप्त करने के लिए करते आ रहे है ,लेकिन काली तुरमुली का प्रयोग प्राचीन समय से गृह बाधा के अलावा काला  जादू , ऊपरी हवा , बुरी नज़र के बचाव के लिए किया जाता रहा है , अघोर साधना करने वाले तांत्रिक अपनी किर्या करने से पहले ही इसे सिद्ध करके सुरक्षा कवच की तरह पहनते आ रहे है ,इस पर वास्तु आ ज्योतिष के अनुसार बहुत शोध के बाद हमने इसके अंगूठियों पे पहनने के अलावा वास्तु में भूमि शोधन ,मकान , दुकान , फैक्ट्री आदि में बुरी नजर , किया कराया , भुतबाधा ,काला जादू आदि से बचाव के लिए इसके कच्चे जमीं से निकले हुए टुकड़ो को विभिन्न स्थल मैं जमीं में गड़वाने और विभिन्न दिशाओं मैं बड़े बड़े टुकड़े रखवाने का प्रयोग किया जिसमे हमे ९०% से अधिक सफलता प्राप्त हुई , इस पत्थर के लगने से काला  जादू ,बुरी नजर से बचाव मैं बहुत आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त हुए। साथ ही इस पत्थर को तराश  कर और पोलिश करके अंगूठियों और पैंडल के रूप में पहनने से भी बहुत अच्छे परिणाम मिलते है। 
इसके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए व इसे कैसे लगाए या पहने इसके लिए संपर्क करें -
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